Dengue Fever एक मौसमी बुखार है जो डेंगू वायरस नामक वायरस से होता है। यह वायरस एडेस मच्छरों द्वारा फैलता है जो संक्रमित व्यक्ति से संक्रमित होते हैं। यह बुखार अक्सर गर्मी के मौसम में होता है जब मच्छरों की संख्या ज्यादा होती है।
Dengue Fever के लक्षण में बुखार, ठंडी-गर्मी, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द और उच्च बुखार शामिल होते हैं। इसके अलावा, इसमें सिरदर्द, आंखों में लाली, सांस लेने में तकलीफ, खांसी और थकान जैसे अन्य लक्षण भी हो सकते हैं।
डेंगू बुखार गंभीर हो सकता है और कई बार जानलेवा होता है। इसके इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह और उचित दवाओं का सेवन किया जाना चाहिए। डेंगू से बचाव के लिए, मच्छरों के कटने से बचना चाहिए और अधिकतम संभव स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए।
Dengue Fever कितने दिन तक रहता है कौन सी दवा लेनी चाहिए?
डेंगू कितने दिन तक रहता है?
Dengue Fever की अवधि अक्सर 3 से 10 दिनों तक होती है। लेकिन इस अवधि के दौरान व्यक्ति को असुविधाजनक लक्षणों का सामना करना पड़ता है। लक्षणों की गंभीरता व्यक्ति के उम्र, स्वस्थ अवस्था, और उनके शरीर के विरोधक क्षमता पर निर्भर करती है।डेंगू बुखार के शुरूआती लक्षण अक्सर 3-7 दिनों तक होते हैं। अधिकतर मरीजों के लिए, बुखार की अवधि 2-7 दिन होती है और उन्हें बेहतर महसूस होता है इसके बाद उनकी स्थिति सुधरने लगती है। हालांकि, कुछ लोगों में लक्षण बुखार के साथ 10 दिन से अधिक भी रह सकते हैं।
अधिकतर मरीजों के लिए, Dengue Fever के लक्षणों की गंभीरता 3-4 दिनों तक होती है, उसके बाद उनकी स्थिति सुधरने लगती है। हालांकि, गंभीर मामलों में, जो अत्यधिक डेंगू बुखार हो सकते हैं, मरीज के लिए असुविधाजनक लक्षणों की अवधि अधिक हो सकती है और उन्हें अस्पताल में भर्ती करना भी हो सकता है
डेंगू मै कौन सी दवा लेनी चाहिए?
डेंगू बुखार से पीड़ित व्यक्ति को पर्याप्त आराम देना चाहिए ताकि उनके शरीर को बुखार के खिलाफ लड़ने के लिए समय मिल सके। उन्हें पर्याप्त पानी पीना चाहिए और विशेष रूप से इलेक्ट्रोलाइट वाले पेय जैसे कि नारंगी पानी, नारियल पानी, लेमनेड आदि पीना चाहिए। उन्हें प्रतिदिन अपने खानपान में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और चीनी शामिल करना चाहिए।बुखार और दर्द के लिए, डॉक्टर पैरासिटामोल जैसी जनरल पेन किलर की सलाह देते हैं, लेकिन इससे पहले उनसे परामर्श लेना चाहिए। एक डेंगू मरीज को अपने इलाज के बारे में अपने चिकित्सक से पूरी जानकारी लेनी चाहिए और वे अपने स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी संदेह को साझा करना नहीं छोड़ने चाहिए।
डेंगू बुखार की पहचान क्या है?
- बुखार: ज्यादातर मरीजों में डेंगू बुखार का शुरुआती लक्षण तेज बुखार होता है। इस बुखार के साथ साथ शरीर में दर्द और थकान भी होती है।
- सिरदर्द: डेंगू बुखार के मरीजों में सिरदर्द भी हो सकता है जो आमतौर पर अधिक होता है।
- जुखाम और खांसी: मरीज को जुखाम और खांसी भी हो सकती है, जो डेंगू बुखार के अन्य लक्षणों के साथ साथ शुरू होते हैं।
- बुखार रोकने का प्रयास: डेंगू बुखार के मरीज एक असामान्य लक्षण दिखाते हैं, जो यह है कि वे बुखार रोकने के लिए एक ताकती माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। इससे मतलब है कि वे फैन चलाते हैं या झाड़ू जलाते हैं।
- लाल दाने: कुछ मरीजों में लाल दाने होते हैं जो शरीर के विभिन्न भागों में नजर आ सकते हैं।
डेंगू में प्लेटलेट्स कब गिरते हैं?
डेंगू में प्लेटलेट्स बुखार के 3-5 दिनों के बीच गिरना शुरू होते हैं। यह गिराव कई बार बुखार के साथ होता है जो अधिकतर मरीजों में 7-10 दिन तक चलता है। अगर प्लेटलेट्स की संख्या बहुत कम हो जाती है, तो उनकी संख्या को बढ़ाने के लिए उपचार आवश्यक होता है।डेंगू बुखार कितने दिन तक रहता है?
डेंगू बुखार आमतौर पर 3 से 10 दिन तक रहता है। इस अवधि के दौरान बुखार, सिरदर्द, थकान, जोड़ों और पेट में दर्द, सूखी खांसी, त्वचा में चकत्ते, नाक से खून आना और आंतों से खूनी दस्त जैसे लक्षण हो सकते हैं। डेंगू बुखार सामान्यतया तीन चरणों में होता है: अवधि 1 में बुखार होता है, अवधि 2 में लक्षण बढ़ते हैं और अवधि 3 में बुखार कम होता है और मरीज की स्थिति सुधरने लगती है।क्या प्लेटलेट्स डोनेट करने में कोई खतरा है?
प्लेटलेट्स डोनेट करना सामान्यतः सुरक्षित होता है और इससे लंबी अवधि तक नुकसान के आसार नहीं होते हैं। डोनेशन के दौरान उपयुक्त साफ़ और स्टेराइल उपकरण का उपयोग किया जाता है जो कि रोगों के फैलने से रोकने में मददगार होते हैं।यदि आप प्लेटलेट्स डोनेट करना चाहते हैं तो आपको कुछ सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे कि डोनेशन के पहले आपको दोनों हाथों को अच्छी तरह से धोना चाहिए और डोनेशन के दौरान आपको एक स्थिर आरामदायक स्थान पर बैठे रहना चाहिए। इसके अलावा, डोनेशन करने से पहले आपको अपने चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए, विशेष रूप से यदि आपके पास कोई रोग या उपचार चल रहा हो।
डेंगू बुखार के 3 चरण क्या हैं?
डेंगू बुखार के तीन चरण होते हैं:- उपशमन अवस्था: यह डेंगू के शुरुआती चरण होता है जिसमें व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द, थकान, और शरीर में दर्द जैसे लक्षण होते हैं। इस अवस्था में व्यक्ति को पर्याप्त आराम और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी जाती है।
- प्रगति अवस्था: यह चरण बुखार के बढ़ने के साथ शुरू होता है और इसमें व्यक्ति को ज्यादा बुखार, उल्टी, पेट में दर्द, सांस लेने में मुश्किल, और त्वचा में लाल चकत्ते जैसे लक्षण होते हैं। इस अवस्था में व्यक्ति को उचित चिकित्सा देना चाहिए ताकि उन्हें उचित उपचार मिल सके।
- उतार अवस्था: यह चरण डेंगू के निदान और उपचार के बाद होता है जब बुखार उतर जाता है। इस अवस्था में व्यक्ति को आहार और पानी पीने की सलाह दी जाती है और उन्हें आराम की आवश्यकता होती है।
डेंगू टेस्ट कब करवाना चाहिए?
डेंगू टेस्ट करवाने की सलाह तब दी जाती है जब आपको डेंगू बुखार के लक्षण होते हैं जैसे कि अचानक उच्च बुखार, सिरदर्द, थकान, शरीर में दर्द और छाती में सूजन आदि। अगर आपको इन लक्षणों के साथ बुखार होता है तो आपको अपने चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए और उन्हें अपनी स्थिति के बारे में बताना चाहिए। चिकित्सक आपकी जांच करेंगे और जांच के आधार पर टेस्ट की सलाह देंगे।यदि आपके पास डेंगू बुखार के लक्षण होते हैं तो आपको जल्द से जल्द डेंगू टेस्ट करवाना चाहिए। टेस्ट डेंगू के वायरस की उपस्थिति का पता लगाता है और चिकित्सक को उचित उपचार तथा दवाओं का चयन करने में मदद करता है।
हम डेंगू का पता कैसे लगाते हैं?
डेंगू के लक्षण आमतौर पर बुखार के साथ शुरू होते हैं जो अचानक उठता है और बार-बार आता जाता है। इसके अलावा कुछ और लक्षण हो सकते हैं जैसे कि सिरदर्द, थकान, शरीर में दर्द और छाती में सूजन।डेंगू के सामान्य लक्षणों के अलावा, डेंगू बुखार के कुछ विशिष्ट लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे कि सिर पर चकत्ते या लाल चकत्ते, हाथ-पैर में दर्द और छाले, आंखों के पीछे लाल रंग का पानी भर जाना, बच्चों में बार-बार उलटी करना और अपनी चीखें कम कर देना।
यदि आपको ये लक्षण दिखाई देते हैं तो आपको डेंगू बुखार का संदेह हो सकता है। ऐसे में आपको तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। चिकित्सक आपके लक्षणों को देखते हुए आपका डेंगू टेस्ट करवाने की सलाह देंगे और उचित उपचार की सलाह देंगे।
डेंगू की सबसे खतरनाक स्टेज कौन सी है?
डेंगू बुखार की सबसे खतरनाक स्टेज डेंगू हेमोरेजिक फीवर या डेंगू शोक सिंड्रोम (DSS) होता है। यह स्थिति बहुत गंभीर होती है और अक्सर जानलेवा होती है। इस स्थिति में, रक्त प्लेटलेट्स की संख्या बहुत कम हो जाती है और रक्त की विलयन बढ़ जाता है, जिससे शरीर की खून की कमी हो जाती है।इसके अलावा, DSS के लक्षण में ज्यादातर तापमान गिर जाता है, जो शरीर की नमी को कम कर देता है और दिल को ज्यादा चलाने की जरूरत होती है। अधिक से अधिक चिकित्सा उपचार के बिना, यह स्थिति मौत तक पहुंच सकती है।
डेंगू शोक सिंड्रोम (DSS) के लक्षणों में से कुछ हैं:
- तेज बुखार
- थकान
- दर्द या दबाव सीने में
- श्वसन में परेशानी
- चक्कर आना या बेहोशी की अवस्था
- शरीर में तेज दर्द, खुजली या लाल चकत्ते
- नीचे हुए अंगों में सूजन
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